
अंधेरे मे ही गुज़र कर लेंगे ,
जिंदगी यू ही बसर कर लेंगे .
शोलों सा जलना याद नही है ,
शबनम सा सफर कर लेंगे .
जीना भी तों एक मज़बूरी है ,
न हो सकेगा ,मगर कर लेंगे .
टूटने से पहले मालूम हो जाए ,
हम ख़ुद को पत्थर कर लेंगे
जिंदगी यू ही बसर कर लेंगे .
शोलों सा जलना याद नही है ,
शबनम सा सफर कर लेंगे .
जीना भी तों एक मज़बूरी है ,
न हो सकेगा ,मगर कर लेंगे .
टूटने से पहले मालूम हो जाए ,
हम ख़ुद को पत्थर कर लेंगे
1 comment:
apki poem humne padhi hain aapbhut acha likhte hain ji
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